20वीं शताब्दी में शहडोल जिले के समाजार्थिक विकास परिदृश्य का ऐतिहासिक अध्ययन
Author : लेफ्टिनेंट डाॅ. राजेश कुमार ठाकुर और शिव कुमार हल्दकार
Abstract :
सामाजिक एवं आर्थिक विकास की प्रक्रिया में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के साधन अनिवार्य तत्व और सर्वाधिक सशक्त माध्यम हैं। क्षेत्र में उपलब्ध शिक्षण संस्थान जहाँ समाज को स्वावलम्बन एवं आत्मनिर्भरता प्रदान करते हैं, वहीं रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर आर्थिक विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं। शिक्षा एवं स्वास्थ्य ही किसी समाज की वह सुदृढ़ नींव है, जिस पर मानवीय एवं आर्थिक विकास की ऊँची इमारतें सफलतापूर्वक निर्मित की जा सकती हैं। अतः इन तीनों आधारभूत क्षेत्रों शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार, के समन्वित एवं संतुलित विकास के बिना किसी भी क्षेत्र की समग्र प्रगति की कल्पना करना संभव नहीं है। विविधता में एकता को समेटे विशाल भारत वर्ष के प्रत्येक क्षेत्र की अपनी एक पृथक पहचान एवं विशेषता है। प्रत्येक क्षेत्र अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा, वेशभूषा, जीवनशैली, खान-पान, रीतिरिवाज एवं सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक स्थितियाँ इत्यादि के कारण वैंसे ही है, जैंसे किसी माला में भिन्न-भिन्न प्रकार के रत्नों को पिरोया गया है। इनमें से एक रत्न हमारा शहडोल जिला भी एक है, जो अपनी कई विभिन्निताओं के कारण प्रदेश में एक विशिष्ट स्थान रखता है। क्षेत्र के आर्थिक विकास का एक सशक्त माध्यम कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों को भी माना जाता है। शहडोल जिला भी कृषि प्रधान जिला है। 20वीं शताब्दी में शहडोल संभाग अंतर्गत आने वाले जिले शहडोल जिले के समाजार्थिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य के ऐतिहासिक अध्ययन को यहां विश्लेषित किया गया है।
शहडोल मध्यप्रदेश का एक सम्भाग और जिला मुख्यालय है। शहडोल जिले की स्थापना 1956 में मध्य प्रदेश के पुनर्गठन के सांथ ही की गई थी। शहडोल मध्य प्रदेश के उमरिया, अनूपपुर, सीधी, सतना और छत्तीसगढ़ के कोरबा और बिलासपुर जिलों से घिरा हुआ है। इस जिले की मुख्य नदी सोन और जोहिला है। शहडोल जिले में 6 तहसील-ब्यौहारी, जयसिंहनगर, सोहागपुर, गोहपारु, बुढार और जैतपुर है।
Keywords :
20वीं शताब्दी, सामाजिक व आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार का संतुलित विकास, आत्मनिर्भरता, पुनर्गठन।