Download PDF

रामप्यारे रसिक के काव्य साहित्य का अध्ययन

Author : डाॅ. स्नेहलता निर्मलकर और नीलम सोनी

Abstract :

पद्य साहित्य की सैद्धान्तिकी का प्रश्न साहित्य का मूल प्रश्न है। पद्य और गद्य का विभाजन क्रमशः हमारे साहित्यशास्त्रियों ने कर दिया, लेकिन प्राचीन काल में साहित्य मात्र को पद्म की कहा जाता था। अतः इस दृष्टि से पद्म अथवा कविता साहित्य की सर्वाधिक प्राचीन विधा है। कविता की परिभाषा करते हुए आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इसे ‘‘मुक्तावस्था’’ कहा है मुक्तावस्था का तात्पर्य स्पष्ट करते हुए शुक्ल जी ने ‘‘मनुष्य को लोक सामान्य की भाव भूमि पर पहुँचना‘‘ बताया है। यानी कविता के माध्यम से हम अपने को जानने का सूत्र पाते हैं। कविता बाहरी आवरणों के भेदकर मनुष्य को उसके मूल तक पहुँचाने का कार्य करती है। कविता की भाषा बिम्ब बहुला एवं सघन भाषा होती है। इसीलिए गद्य की स्थूलता एवं तथ्यात्मकता से कविता अपने को अलग कर लेती है।

Keywords :

पद्य, यथार्थ, साहित्य, लोक सामान्य, मुक्तावस्था।