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अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं की उद्यमिता जागरूकता अनुशीलन की स्थिति (छिंदवाड़ा जिले के विशेष संदर्भ में)

Author : डॉ. मीना पाराशर और निक्‍की अहिरवार

Abstract :

उद्यमिता जागरूकता का प्रारम्‍भ संयुक्‍त राष्‍ट्र में 19 नवम्‍बर 2014 से माना जाता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में आज भी 19 नवम्‍बर को महिला उद्यमिता जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में इसकी शुरूआत वर्ष 1991 से मानी जाती है। यद्यपि महिलाओं में उद्यमिता के गुण तो पूर्व से ही थे किन्‍तु पारिवारिक उत्‍तरदायित्‍वों, रीति-रिवाजों एवं रूढि़गत परम्‍पराओं के चलते उनके कौशलों की पहचान नहीं हो सकी। साथ ही इस दिशा में शासन के प्रयास भी सीमित प्रतीत हुए है। किसी भी विषय पर अत्‍यधिक सूक्ष्‍मता व गहराई से चिंतन-मनन की क्रिया या भाव को अनुशीलन कहा जाता है। महिलाओं की उद्यमिता जागरूकता अनुशीलन से तात्‍पर्य यह है कि अध्‍ययन क्षेत्र छिंदवाड़ा जिले की अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं की उद्यमिता जागरूकता के पूर्व एवं पश्‍चात् आने वाले परिवर्तनों का बड़ी ही सूक्ष्‍मता से अध्‍ययन करना है।
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आज महिलाओं द्वारा अपनी दृढ़ संकल्प शक्ति, कर्तव्‍य परायणता तथा सहनशीलता के द्वारा धीमे-धीमे ही सही लेकिन परिवर्तन दृष्टिगोचर होता हैं इस परिवर्तन में शासन, प्रशासन एवं स्वयं महिलाओं की गौरव गाथा भी शामिल है। महिला ने अपने प्रभाव से समाज को चतुर्दिक प्रभावित किया है, जो सामाजिक सशक्तिकरण का लक्षण है। आज महिलायें अपने पुत्र-पुत्रियों को शिक्षा दिला रही हैं। वे स्वतंत्रता से चाहे जहाँ आ-जा रही हैं, उनमें एक आत्म विश्वास दिखाई देता है। वे अब घूंघट में सिमटकर नहीं रह गयी हैं अपने ऊपर हो रहे जुल्मों का प्रतिकार करती हैं। इसके लिए वे पुलिस व प्रशासन का सहारा ले रही हैं, आज बाल-विवाह, बेमेल विवाह समाप्ति की ओर है, विधवा विवाह को प्रोत्साहन मिल रहा है। अंध विश्वासी की डोर उनके हाथों से छूट रही है। छुआ-छूत की भावना क्रमशः कम हो रही है। महिलायें अब अपने जीवन एवं उन्हें क्या करना है, इसका फैसला वे खुद कर रही हैं। वे अपनी स्वतंत्रता एवं अधिकारों का उपयोग सजगता तथा सतर्कता से कर रही हैं। सामाजिक रूढ़ियों के भंवरजाल से निकलकर उनके पक्ष में क्या है उन्हें किसमें फायदा हैं ? इसका अंदाजा और अंदेशा उनकी दूरदर्शिता को उजागर करता है। आज वे बेहिचक होकर पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकर प्रत्येक क्षेत्र में काम कर रही है। यह रूढ़ियों एवं सामाजिक कुरीतियों की तिलांजलि का प्रमाण है। इस प्रकार हमें आज के समाज में महिलाओं के सामाजिक सशक्तिकरण के लक्षण दृष्टव्य हो रहे हैं I

Keywords :

उद्यमिता जागरूकता, शासकीय योजनायें, सामाजिक कुरीतियां, आर्थिक व सामाजिक विकास I