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डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण

Author : सरोज सिंह और डॉ. अमृता कुमारी

Abstract :

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में डिजिटल प्रौद्योगिकी ने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के स्वरूप एवं कार्यप्रणाली में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किया है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ई-शासन तथा डिजिटल संचार माध्यमों के विकास ने नागरिकों को शासन प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता का अवसर प्रदान किया है। इसी परिप्रेक्ष्य में डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण एक ऐसी अवधारणा के रूप में उभरकर सामने आया है, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करना, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित करना तथा नागरिकों को निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी रूप से सहभागी बनाना है।
प्रस्तुत शोध-पत्र में डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की अवधारणा, उसके सामाजिक-आर्थिक आयाम, संभावनाओं एवं चुनौतियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। भारत में डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान प्रणाली, ऑनलाइन जनसेवा पोर्टल, जन शिकायत निवारण तंत्र तथा सूचना के अधिकार से संबंधित डिजिटल व्यवस्थाओं ने शासन की कार्यकुशलता, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को सुदृढ़ किया है। इन पहलों ने विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं, ग्रामीण समुदायों एवं समाज के वंचित वर्गों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिणामस्वरूप नागरिकों की सूचना तक पहुँच, सरकारी सेवाओं की उपलब्धता तथा जनसहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
यद्यपि डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण लोकतंत्र को अधिक समावेशी एवं उत्तरदायी बनाने की दिशा में प्रभावी माध्यम सिद्ध हो रहा है, तथापि डिजिटल विभाजन, डिजिटल साक्षरता की कमी, साइबर अपराध, डेटा गोपनीयता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग तथा भ्रामक सूचनाओं का प्रसार इसके समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ हैं। अतः समावेशी डिजिटल अवसंरचना का विकास, साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना, डेटा संरक्षण के प्रभावी प्रावधान सुनिश्चित करना तथा नागरिकों में डिजिटल साक्षरता एवं नैतिक डिजिटल नागरिकता का विकास समय की प्रमुख आवश्यकता है।
निष्कर्षतः, डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण केवल तकनीकी नवाचार का परिणाम नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, सहभागी एवं समावेशी बनाने की सतत प्रक्रिया है। यदि डिजिटल संसाधनों तक समान पहुँच, प्रभावी नीतिगत क्रियान्वयन तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो डिजिटल प्रौद्योगिकी भारत में सुशासन, सामाजिक न्याय तथा सतत एवं समावेशी विकास के उद्देश्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है I

Keywords :

डिजिटल लोकतंत्र, डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण, ई-शासन, डिजिटल इंडिया, सुशासन, नागरिक सहभागिता, डिजिटल साक्षरता, पारदर्शिता I