लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ के रूप में नीति निर्माण और राजनीतिक जवाबदेही में भारतीय प्रेस की भूमिका
Author : डॉ. नितिन कुमार मिश्रा
Abstract :
भारतीय लोकतंत्र के सुचारू संचालन में प्रेस (मीडिया) को 'चतुर्थ स्तंभ' के रूप में स्वीकार किया गया है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के समानांतर प्रेस जनहित के मुद्दों को स्वर देकर शासन व्यवस्था को पारदर्शी बनाता है। प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषित करना है कि भारतीय प्रेस किस प्रकार देश के नीति निर्माण (Policy Making) को प्रभावित करता है और सत्ता में बैठे लोगों की राजनीतिक जवाबदेही (Political Accountability) सुनिश्चित करता है। मिश्रित शोध पद्धति और सामग्री विश्लेषण (Content Analysis) के आधार पर यह शोध समकालीन दौर में प्रेस के समक्ष उपस्थित चुनौतियों जैसेपेड न्यूज, कॉरपोरेट नियंत्रण और डिजिटल भटकाव का भी आलोचनात्मक मूल्यांकन करता है।
नीति निर्माण की प्रक्रिया में प्रेस 'एजेंडा सेटिंग' के माध्यम से हाशिए के मुद्दों को मुख्यधारा में लाता है, जिससे सरकारें जनहितैषी कानून बनाने के लिए विवश होती हैं। साथ ही, सार्वजनिक बहसों को मंच प्रदान कर यह नीतियों के व्यावहारिक मूल्यांकन में मदद करता है। दूसरी ओर, खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) के जरिए विभिन्न प्रशासनिक विसंगतियों और वित्तीय घोटालों को उजागर कर प्रेस शासन में पारदर्शिता लाता है, जिससे चुनावी और संसदीय जवाबदेही सुदृढ़ होती है।
हालाँकि, वर्तमान परिदृश्य में प्रेस की साख पर गहरा संकट मंडरा रहा है। व्यावसायिक हितों की अंधी दौड़, सनसनीखेज खबरें (TRP की होड़), पेड न्यूज़ और डिजिटल स्पेस में अनियंत्रित 'फेक न्यूज़' के प्रसार ने मीडिया की तटस्थता को गंभीर चोट पहुँचाई है। निष्कर्षतः, यह पत्र रेखांकित करता है कि एक जीवंत, पारदर्शी और सशक्त लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रेस का कॉरपोरेट व राजनैतिक दबावों से मुक्त होकर वित्तीय और वैचारिक रूप से स्वतंत्र होना अनिवार्य है I
Keywords :
चतुर्थ स्तंभ, नीति निर्माण, राजनीतिक जवाबदेही, खोजी पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया, भारतीय लोकतंत्र I