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राजस्थान में स्थानीय स्वशासन का संगठनात्मक ढांचा एवं महत्वपूर्ण प्रावधान वर्तमान संदर्भ में

Author : डॉ. वीरेंद्र सिंह चौधरी

Abstract :

भारत में पंचायत राज व्यवस्था की संकल्पना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज एवं विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था के दृष्टिकोण की प्रतिकृति है। संविधान निर्माण के समय भी महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज विषय पर गंभीर चर्चा हुई और इसी के तहत संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 40 में पंचायती राज व्यवस्था का प्रावधान जोड़ा गया। बाद में गांधी जी की इसी अवधारणा को मध्य नजर रखते हुए राजस्थान के नागौर जिले के बगतरी गांव से 2 अक्टूबर, 1959 को प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने पंचायत राज व्यवस्था का विधिवत शुभारंभ किया। एकाधिक उदाहरणों से दृष्टिगत होता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी पंचायत राज व्यवस्था को किसी न किसी रूप में पोषित ही किया है। जहां ब्रिटिश सरकार ने 1860 में सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट बनाया, वहीं गवर्नर जनरल लॉर्ड मैयो ने 1870 में स्थानीय स्वशासन के नाम पर पंचायतों को नए सिरे से विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। गवर्नर जनरल लॉर्ड रिपन ने 1882 में इन सभी प्रस्तावों का अध्ययन करने के बाद "लोकल सेल्फ गवर्नमेंट" को मंजूरी दी। इसी कारण लॉर्ड रिपन को भारत में पंचायत राज व्यवस्था का जनक भी माना जाता है। मेरा यह शोध आलेख भी राजस्थान में स्थानीय स्वशासन के संगठनात्मक ढांचे की संस्थापना, उसकी प्रमुख गतिविधियां, उसकी मजबूती में आ रही प्रमुख समस्याओं के विश्लेषणात्मक अध्ययन पर आधारित है I

Keywords :

पंचायत राज व्यवस्था, नीति निर्देशक तत्व, बगतरी, लोकल सेल्फ गवर्नमेंट, सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, स्थानीय स्वशासन, विकेंद्रीकृत शासन आदि I