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राजस्थान में महिला सशक्तिकरण: प्रमुख योजनाएं, समस्या एवं समाधान के उपाय

Author : डॉ. विकास कुमार शर्मा

Abstract :

महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं को उनके जीवन के हर क्षेत्र में स्वतंत्रता, समानता और आत्मनिर्भरता का अधिकार प्रदान करना है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है. जो महिलाओं को उनकी क्षमताओं और अधिकारों का एहसास कराकर उन्हें समाज में गरिमामय और स्वतंत्र जीवन जीने का अवसर देती है। भारतीय संस्कृति में महिलाएं सदैव सृजन, शक्ति और सहिष्णुता का प्रतीक रही है। प्राचीन वैदिक काल में महिलाओं को समाज में पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त थे। वें शिक्षा, धर्म, और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती थी। लेकिन समय के साथ सामाजिक संरचना में बदलाव आया और मध्यकाल में महिलाओं की स्थिति में भारी गिरावट आई। उन्हें शिक्षा, संपत्ति और स्वतंत्रता जैसे अधिकारों से वंचित कर दिया गया। सामाजिक कुरीतियों जैसे सती प्रथा, कन्या वध, बाल विवाह और पर्दा प्रथा ने महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित कर दिया।

Keywords :

महिला सशक्तिकरण, स्वतंत्रता संग्राम, नवजागरण काल, समान अवसर, स्वतंत्र निर्णय, शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक अधिकार, सशक्त समाज आदि I