Download PDF

सोशल मीडिया: भारत में वंचित समुदायों की आवाज़ का वैकल्पिक मंच – अवसर एवं चुनौतियाँ

Author : डॉ. अजय प्रकाश सरोज

Abstract :

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भारत के हाशिए पर स्थित समुदायों—दलित, आदिवासी, महिलाएँ, अल्पसंख्यक तथा किसानों—के लिए मुख्यधारा मीडिया की कमी को पूरा करने वाला एक लोकतांत्रिक माध्यम उपलब्ध कराया है। यह डिजिटल सक्रियता, हैशटैग-आधारित अभियानों तथा सामुदायिक जुड़ाव के जरिए सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है। तथापि, एल्गोरिदमिक पक्षपात, ऑनलाइन ट्रोलिंग, डिजिटल विभाजन, प्लेटफॉर्म-स्तरीय सेंसरशिप तथा सूचना प्रौद्योगिकी (अंतरिम दिशानिर्देश) संशोधन नियम 2026 जैसी बाधाएँ भी उभर रही हैं। वर्तमान अध्ययन द्वितीयक स्रोतों, प्रमुख केस अध्ययनों (#DalitLivesMatter, किसान आंदोलन 2020-21) तथा हालिया शोध (University of Bath, 2026; Frontiers in Communication, 2025) के विश्लेषण पर आधारित है। विशेष रूप से, बुंदेलखंड अंचल में संचालित ‘खबर लहरिया’ को एक प्रमुख केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया है, जो दलित और पिछड़ी महिलाओं द्वारा संचालित एक फेमिनिस्ट मीडिया प्लेटफॉर्म है। यह सोशल मीडिया के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की आवाज़ को वैश्विक मंच प्रदान करता है, लेकिन डिजिटल असमानताओं और ट्रोलिंग जैसी चुनौतियों का सामना करता है। निष्कर्ष है कि सोशल मीडिया वंचितों की अभिव्यक्ति को सशक्त बनाता है, किंतु यह सामाजिक असमानताओं को डिजिटल रूप में भी पुनरुत्पादित कर सकता है। समाधान के रूप में डिजिटल साक्षरता, नीतिगत सुधार तथा विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म्स का प्रोत्साहन आवश्यक है I

Keywords :

सोशल मीडिया, वंचित समुदाय, दलित सशक्तिकरण, डिजिटल सक्रियता, हैशटैग अभियान, सेंसरशिप, IT Rules 2026, भारत, खबर लहरिया, बुंदेलखंड, फेमिनिस्ट मीडिया, ग्रामीण पत्रकारिता I