मानवाधिकार एक संवैधानिक उपचार
Author : प्रो. मंगली बंजारा
Abstract :
मानवाधिकार मानव की स्वतंत्रता, समानता एवं शान से जीने की गरिमा का अधिकार है प्राकृतिक रूप से मानव को अनेक शक्ति एवं अधिकार प्राप्त है जो जीवन को सरलता, सहजता एवं अपने हिसाब से जीने के अनुकुल बनाता है।
मानव अधिकार वह अधिकार है जो मानव के प्रकृति एवं उसके स्वभाव पे समाहित है इसके अभाव में मानव अपने इच्छा के अनुरूप नहीं जी सकता। मानव अधिकार एवं मौलिक स्वतंत्रता इसे पूर्ण करने के लिए अवसर प्रदान करती है, अधिकार हमारे सामाजिक जीवन को अनिवार्य आवष्यकताऐं है। इसके बिना व्यक्ति अपने अस्तित्व का विकास नहीं कर सकता और न ही समाज के लिए उपयोगी कार्य कर सकता है। मानव अधिकार के बिना व्यक्ति अपने अस्तित्व एवं आपने अधिकारों की कल्पना नहीं कर सकता, मानवाधिकार प्रत्येक व्यक्ति का प्राकृतिक एवं नैसर्गिक अधिकार है यह अधिकार मानव को आजादी, बराबरी एवं समानता का अधिकार प्रदान करता है। इसके साथ ही जीवन जीने के लिए सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक सभी प्रकार के अधिकार मिलता है। प्रत्येक वर्ष 10 दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है।
Keywords :
मानवाधिकार, स्वतंत्रता, सहजता, अस्तित्व, नैसर्गिक, सार्वभौमिक, वैकल्पिक, ऐतिहासिक, गिरफ्तारी, प्राकृतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आदि।