क्या बाजार आधारित अर्थव्यवस्था सुशासन को सुदृढ़ करती है? संसाधन-अभाव, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक प्रशासन का एक समालोचनात्मक विश्लेषण: भारत के संदर्भ में
Author : Satpal Singh
Abstract :
सुशासन (Good Governance) की अवधारणा समकालीन लोक प्रशासन, सार्वजनिक नीति तथा विकास अध्ययन का एक केंद्रीय विषय बन चुकी है। सामान्यतः सुशासन को पारदर्शिता, जवाबदेही, विधि का शासन, सहभागिता, दक्षता और उत्तरदायित्व जैसे सिद्धांतों से जोड़ा जाता है। परंतु विकासशील देशों, विशेषकर भारत, के संदर्भ में एक मूलभूत प्रश्न अपेक्षाकृत कम चर्चा में आता है—क्या केवल प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से सुशासन स्थापित किया जा सकता है, या संसाधनों के आवंटन की आर्थिक व्यवस्था भी इसकी सफलता को प्रभावित करती है?
भारत जैसे देश में जहाँ जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है, संसाधन सीमित हैं तथा अनेक आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के वितरण में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका है, वहाँ संसाधनों की कमी, मूल्य-नियंत्रण, सब्सिडी आधारित वितरण तथा प्रशासनिक विवेकाधिकार कई बार भ्रष्टाचार, मध्यस्थता (Rent-seeking) और संसाधनों के दुरुपयोग की संभावनाएँ बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर बाजार आधारित व्यवस्था प्रतिस्पर्धा, मूल्य संकेत (Price Signals) और संसाधनों के तुलनात्मक रूप से अधिक दक्ष आवंटन का समर्थन करती है, किंतु इससे समानता, सामाजिक न्याय और सार्वभौमिक पहुँच जैसी नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
यह अध्ययन राज्य-नियंत्रित एवं बाजार-आधारित संसाधन आवंटन प्रणालियों का सुशासन के संदर्भ में समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। शोध का उद्देश्य किसी एक आर्थिक व्यवस्था को पूर्णतः श्रेष्ठ सिद्ध करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि किन परिस्थितियों में कौन-सी व्यवस्था भ्रष्टाचार को कम करने, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तथा नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाएँ उपलब्ध कराने में अधिक प्रभावी सिद्ध होती है।
यह शोध गुणात्मक (Qualitative) पद्धति पर आधारित है तथा इसमें सार्वजनिक प्रशासन, राजनीतिक अर्थव्यवस्था, संस्थागत अर्थशास्त्र और सुशासन संबंधी प्रमुख सिद्धांतों का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), जन औषधि, एलपीजी सब्सिडी तथा अन्य प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों के अनुभवों का भी अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन का उद्देश्य सुशासन और आर्थिक व्यवस्था के बीच संबंधों को अधिक व्यापक, संतुलित और सैद्धांतिक आधार पर समझना है I
Keywords :
सुशासन, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक प्रशासन, भ्रष्टाचार, संसाधन-अभाव, राजनीतिक अर्थव्यवस्था, भारत I