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किसानों के आर्थिक विकास में मध्य प्रदेश शासन की भावांतर योजना का योगदान (मध्य प्रदेश राज्य के संदर्भ में)

Author : दिनेश कुमार दुबे

Abstract :

मध्यप्रदेश, किसानों को उपज का उचित लाभ दिलवाने के लिए भावान्तर योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। भावांतरण योजना (मुख्‍यत: हरियाणा और मध्‍यप्रदेश में संचालित है)। मध्यप्रदेश में सोयाबीन के लिए वर्ष 2025-26 की भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत किसानों के लिए पंजीयन प्रक्रिया 03 अक्टूबर 2025 से प्रारम्‍भ की गई थी। यह योजना के माध्‍यम से बाजार मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) से कम होने पर अंतर की राशि सीधे किसानों के खातों में प्रदान की जाती है, खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक लागू की गई। इस योजना को मुख्‍य रूप से कृषि विपणन सुधार योजना कहा जा सकता है, जो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने पर बाजार मूल्य और सरकार द्वारा तय संरक्षित मूल्य (Support Price) के बीच के अंतर की भरपाई करती है। यह योजना सब्जी, फल और प्रमुख फसलों जैसे - सोयाबीन, बाजरा के लिए जोखिम को कम करती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान से सुरक्षित करती है। भावांतर योजना अन्नदाता (कृषकों) के उत्थान का पर्याय है। इस योजना के माध्‍यम से किसानों को दी गई एमएसपी की गारंटी की पूर्ति करते हुए सोयाबीन भावांतर योजना में 1 लाख 33 हजार किसानों के खाते में 233 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई है। विगत वर्ष सोयाबीन का भाव 4800 रुपए था, इस बार किसानों को 500 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ देकर 5300 रुपए से अधिक कीमत पर सोयाबीन क्रय किया जा रहा है। भावान्तर योजना के लिए प्रदेश में 9 लाख से अधिक किसानों ने सोयाबीन बेचने के लिए पंजीयन किया। प्रदेश में 220 से अधिक मुख्य मंडियों और 80 उप मंडियों में फसलें खरीदी की जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए भावांतर कॉल सेंटर भी स्थापित किए गए है। भावांतर योजना लागू होने से फसल के विक्रय में किसानों को होने वाली अनेक कठिनाईयां दूर हुई हैं I

Keywords :

एम.एस.पी. गारंटी, विपणन सुधार, आर्थिक उत्‍थान I