Download PDF

भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के शैक्षिक दर्शन का विश्लेषण

Author : डॉ. विनोद प्रकाश तिवारी और सत्य नरायन यादव

Abstract :

प्रस्तुत शोध पत्र स्वामी विवेकानंद के शैक्षिक दर्शन को भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के व्यापक आलोक में विश्लेषित करने का एक विनम्र प्रयास है। स्वामी विवेकानंद का शैक्षिक चिंतन न केवल कालजयी है, बल्कि यह आधुनिक शिक्षा के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का समाधान करने में भी सक्षम है। उनके अनुसार, शिक्षा का अर्थ केवल सूचनाओं का संचय या केवल जीविकोपार्जन की क्षमता विकसित करना नहीं है, बल्कि 'मनुष्य में निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति' है। यह शोध पत्र इस दार्शनिक आधार को केंद्र में रखकर स्वामीजी के उन विचारों की व्याख्या करता है, जो मनुष्य के आत्मिक, बौद्धिक और शारीरिक उत्थान के लिए अनिवार्य हैं। वर्तमान समय में जब भारत अपनी शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुन: जुड़ने का प्रयास कर रहा है, तब 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP) 2020 की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। प्रस्तुत शोध में यह गहन विश्लेषण किया गया है कि कैसे स्वामी विवेकानंद के शैक्षिक विचार विशेष रूप से चरित्र निर्माण, आत्म-निर्भरता, और मानवतावादी दृष्टिकोण NEP 2020 के प्रमुख लक्ष्यों और उद्देश्यों के साथ सामंजस्य बिठाते हैं। यह शोध स्पष्ट करता है कि विवेकानंद द्वारा प्रतिपादित 'मानव-निर्माण' (Man-making) की शिक्षा ही वह आधार है, जिस पर एक सशक्त, नैतिक और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव है।
शोध के मुख्य उद्देश्य के अंतर्गत स्वामीजी के 'ज्ञान योग', 'भक्ति योग', 'कर्म योग' और 'राज योग' के सिद्धांतों को शैक्षिक प्रक्रिया में समाहित करने के व्यावहारिक पहलुओं को रेखांकित किया गया है। इसके साथ ही, यह पत्र तपोवन-आधारित अनुशासन और आधुनिक तकनीक के समन्वय की आवश्यकता पर भी बल देता है। अंततः, यह शोध इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि यदि हम शिक्षा में आध्यात्मिकता और विज्ञान का संतुलित समावेश करते हैं, तो भारत पुनः विश्व गुरु बनने की अपनी गौरवशाली परंपरा को प्राप्त कर सकेगा। यह सारांश उस विस्तृत शोध यात्रा का संक्षिप्त परिचय है, जो इस पत्र के विभिन्न अध्यायों में विस्तार से वर्णित है और जो भावी शोधकर्ताओं के लिए एक नई दिशा प्रदान करती है I

Keywords :

भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS), स्वामी विवेकानंद का शैक्षिक दर्शन, मानव मूल्य, आध्यात्मिकता और विज्ञान का समन्वय I