Download PDF

स्वतंत्रता पश्चात से सूचना क्रांति के युग तक भारतीय प्रेस का विकास, आलोचनात्मक विवेक के बदलते प्रतिमानों का एक ऐतिहासिक अनुशीलन

Author : डॉ. नितिन कुमार मिश्रा

Abstract :

प्रस्तुत शोध पत्र वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता से लेकर 21वीं सदी की 'सूचना क्रांति' (Digital and Information Revolution) के दौर तक भारतीय प्रेस के ऐतिहासिक क्रमिक विकास और उसके वैचारिक स्वरूप का विश्लेषण करता है। औपनिवेशिक दौर में जहाँ प्रेस एक 'मिशन' (स्वतंत्रता संग्राम का हथियार) के रूप में कार्य कर रहा था, वहीं आजादी के बाद इसके सामने राष्ट्र-निर्माण, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और लोक-कल्याण की निगरानी करने की नई चुनौतियाँ थीं।
यह शोध दर्शाता है कि प्रेस ने भारतीय जनमानस में 'आलोचनात्मक विवेक' (Critical Thinking) को बनाए रखने में किस प्रकार केंद्रीय भूमिका निभाई है। प्रथम प्रेस आयोग के गठन, भाषाई पत्रकारिता के उभार, आपातकाल (1975-77 ई.) के दौरान सेंसरशिप के विरुद्ध संघर्ष, और 1990 के दशक के आर्थिक उदारीकरण के बाद इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया के आगमन जैसे ऐतिहासिक मोड़ों का विश्लेषण करते हुए यह पत्र प्रमाणित करता है कि तकनीकी बदलावों ने प्रेस के आलोचनात्मक चरित्र को प्रभावित किया है। शोध के निष्कर्ष यह रेखांकित करते हैं कि सूचना क्रांति ने जहाँ सूचनाओं का लोकतंत्रीकरण किया है, वहीं व्यावसायिकता के दबाव में प्रेस के पारम्परिक आलोचनात्मक विवेक के समक्ष नई वैचारिक चुनौतियाँ भी खड़ी की हैं I

Keywords :

भारतीय प्रेस, सूचना क्रांति, आलोचनात्मक विवेक, राष्ट्र-निर्माण, आपातकाल, भाषाई पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया I