डिजिटल गवर्नेंस में मानवीय संवाद का संकट: भारत की नागरिक शिकायत निवारण प्रणाली का गुणात्मक अध्ययन
Author : Satpal Singh
Abstract :
डिजिटल गवर्नेंस (Digital Governance) ने भारत में सार्वजनिक प्रशासन और सेवा वितरण की प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन किए हैं। ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन, डिजिटल पहचान, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) तथा ई-गवर्नेंस प्रणालियों के माध्यम से शासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और दक्ष बनाने का प्रयास किया गया है। इन सुधारों ने अनेक क्षेत्रों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है तथा नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुँच को सुविधाजनक बनाया है। तथापि, डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार के साथ एक महत्वपूर्ण प्रश्न उभरकर सामने आया है कि क्या डिजिटल माध्यम नागरिकों की जटिल, संदर्भ-आधारित तथा गुणात्मक समस्याओं को उसी प्रभावशीलता से समझ और समाधान कर सकते हैं, जिस प्रकार प्रत्यक्ष मानवीय संवाद के माध्यम से संभव था।
यह अध्ययन इसी प्रश्न का समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। शोध का मूल तर्क यह है कि डिजिटल गवर्नेंस ने शिकायतों के पंजीकरण, निगरानी तथा निस्तारण की मात्रात्मक दक्षता (Quantitative Efficiency) में उल्लेखनीय वृद्धि की है, किन्तु अनेक परिस्थितियों में गुणात्मक न्याय (Qualitative Justice) तथा मानवीय संवाद (Human Interface) की गुणवत्ता में कमी भी आई है। पूर्वनिर्धारित विकल्पों (Predefined Options), स्वचालित प्रक्रियाओं तथा सीमित प्रत्यक्ष संवाद के कारण नागरिक अपनी वास्तविक समस्याओं को पूर्णतः अभिव्यक्त नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप अनेक शिकायतें औपचारिक रूप से निस्तारित (Resolved) तो हो जाती हैं, किन्तु नागरिक की मूल समस्या का समाधान नहीं हो पाता।
यह शोध गुणात्मक (Qualitative) एवं विश्लेषणात्मक (Analytical) पद्धति पर आधारित है। अध्ययन में डिजिटल गवर्नेंस, लोक प्रशासन, नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-Centric Governance), डिजिटल विभाजन (Digital Divide) तथा शिकायत निवारण तंत्र से संबंधित प्रमुख सिद्धांतों का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही CPGRAMS, UMANG, राज्य स्तरीय जन शिकायत पोर्टलों तथा अन्य डिजिटल सेवा प्रणालियों के अनुभवों के आधार पर यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि डिजिटल तकनीक और मानवीय संवाद के मध्य संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जा सकता है।
अध्ययन का उद्देश्य डिजिटल गवर्नेंस का विरोध करना नहीं, बल्कि उसकी संरचनात्मक सीमाओं की पहचान करना तथा ऐसे नीतिगत सुझाव प्रस्तुत करना है जिनसे प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ नागरिकों के अनुभव, सहभागिता और न्यायपूर्ण शिकायत निवारण को भी सुदृढ़ किया जा सके I
Keywords :
डिजिटल गवर्नेंस, ई-गवर्नेंस, नागरिक शिकायत निवारण, मानवीय संवाद, गुणात्मक न्याय, डिजिटल विभाजन, सुशासन, सार्वजनिक प्रशासन, नागरिक-केंद्रित शासन, भारत I