खजुराहो से प्राप्त हिंदू देव प्रतिमाओं में मांगलिक प्रतीक
Author : डॉ. ओम प्रकाश यादव
Abstract :
भारतीय कला में मानवीय और दैवीय तत्वों के मध्य जो संबंध व्यवहार प्रतीत होता है वही कला की आत्मा है और वह अपनी अभिव्यक्ति में प्रतीक का सहारा लेती है। मूर्ति कला में लौकिक-अलौकिक तथ्यों की अभिव्यक्ति के लिए प्रतिको का प्रचलन है। देवता तथा उससे संबंधित विचारों की अभिव्यक्ति प्रतीक के द्वारा प्रकट की जाती है। भारतीय मूर्तिकला में प्रतिकों के माध्यम से देव प्रतिमा का समीकरण भी स्थापित किया जाता है। जिसके चिंतन से देवता के साथ उसके प्रतीक तत्व भी स्मृति में उभर आते हैं। इस प्रकार प्रतीक तत्व प्रतिमा और उससे संबंधित विचारों को परस्पर जोड़ने का कार्य करते हैं। प्रतीक की महत्ता के कारण प्राचीन भारतीय मूर्तिकला ‘प्रतीकात्मक कला’ कही जाती है। खजुराहो से प्राप्त शैव, वैष्णव धर्म के अनेक मंदिरों में विविध देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है जिनमें विविध प्रकार के प्रतिको का अंकन किया गया है जिन्हें अध्ययन की सुविधा अनुसार तीन श्रेणियों, प्रथम आयुध प्रतीक, द्वितीय वाहन प्रतीक और तृतीय मांगलिक प्रतीक के रूप में विभाजित किया गया है।मेरे शोध लेखन का विषय क्षेत्र मांगलिक प्रतीक है अतः इस लेख में मांगलिक प्रतीक का ही उल्लेख किया जा रहा है I
Keywords :
लौकिक, अभिव्यक्ति, मांगलिक, प्रतीक, शैव, वैष्णव, प्रतिमा, प्रतिरूप, मूर्त, अमूर्त I