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भारतीय प्राचीन धार्मिक अवधारणाओं में जीवन की गति का द्योतक - चक्र

Author : पोरस कुमार महावर

Abstract :

वैदिक कालीन संस्कृति में विविध प्राकृतिक धार्मिक अवधारणाओं में चक्र सृष्टि और समय का प्रतीक थी, रोषनी का कारक सूर्य और विष्णु का ’सुदर्शन चक्र’ समय के चक्र के रूप में सर्वोपरि रहा जो दैवीय प्रतीकवाद का प्रतिनिधित्व करता है। प्रतीकवाद में जीवन की चक्रीय प्रकृति, ब्रह्मांडीय व्यवस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विकास हुआ। चक्र की अवधारणा समय के ब्रह्मांडीय व काल चक्र से जुड़ी हुई है। वेद, उपनिषद, जैन और बौद्ध परंपराओं में चक्र शाश्वत नियमों, धार्मिकता और अस्तित्व की चक्रीय प्रकृति का प्रतिनिधित्व करने लगा। जीवन की गति का द्योतक चक्र अपनी विशिष्टताओं के माध्यम से धार्मिक विचार के समय चक्र के सार्वभौमिक अनुप्रयोग की ओर गतिषील रहा।

Keywords :

ब्रह्मांडीय व काल चक्र, प्राचीन परंपर