भारतीय अर्थव्यवस्था पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के व्यापक आर्थिक प्रभावों का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author : डॉ. ज्योति डावर
Abstract :
1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर का कार्यान्वयन भारतीय कराधान प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार के रूप में स्थापित हुआ। “एक राष्ट्र, एक कर” की अवधारणा पर आधारित इस कर सुधार का प्रमुख उद्देश्य अप्रत्यक्ष करों की जटिल संरचना को सरल बनाना, करों के कैस्केडिंग प्रभाव को समाप्त करना तथा एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का निर्माण करना था। प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों पर जीएसटी के प्रभावों का विश्लेषण करना है। अध्ययन विशेष रूप से सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, कर उछाल, राजस्व संग्रह की प्रवृत्तियों तथा आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र पर जीएसटी के प्रभाव का परीक्षण करता है। यह अध्ययन वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-पद्धति पर आधारित है तथा 2017 से 2025 की अवधि के द्वितीयक आँकड़ों का उपयोग करता है। आँकड़े भारतीय रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय और जीएसटी परिषद की आधिकारिक रिपोर्टों से संकलित किए गए हैं। प्री-जीएसटी और पोस्ट-जीएसटी काल के तुलनात्मक विश्लेषण के माध्यम से कर अनुपालन, दक्षता तथा संरचनात्मक परिवर्तनों का मूल्यांकन किया गया है। शोध निष्कर्ष दर्शाते हैं कि जीएसटी ने कर आधार का विस्तार किया है, जिससे कर राजस्व संग्रह में निरंतर वृद्धि हुई है। लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार तथा अंतर-राज्यीय व्यापार बाधाओं में कमी आई है। हालांकि, एमएसएमई क्षेत्र को उच्च अनुपालन लागत, डिजिटल जटिलताओं और प्रारंभिक अनुकूलन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अध्ययन निष्कर्षतः यह प्रतिपादित करता है कि जीएसटी ने भारतीय कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं एकीकृत बनाया है, किंतु इसकी पूर्ण क्षमता प्राप्त करने हेतु कर स्लैब के सरलीकरण और संरचनात्मक सुधारों की निरंतर आवश्यकता बनी हुई है।
Keywords :
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), अप्रत्यक्ष कर सुधार, कर आधार विस्तार, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), राजस्व संग्रह, सहकारी संघवाद, भारतीय अर्थव्यवस्था।