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दिव्यांग बालकों को शिक्षा प्रदत्त करने वाले विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Author : मंजुला मलिक और डॉ. शैली

Abstract :

भारत की शिक्षा प्रणाली देश के सभी बालकों को एक समान रूप से शिक्षा प्रदान करने हेतु सशक्त मूलभूत विद्यालयी ढाँचे का प्रावधान सुनिश्चित करती है। निःशक्त बच्चे हमारे समाज का अभिन्न अंग हैं और समाज में इनकी सहभागिता सुनिश्चित करने तथा इनके मन से हीन भावना का निराकरण करने के लिये इन्हें शिक्षित करना परम आवश्यक है। ऐसे निःशक्त बालकों हेतु भारत सरकार, राज्य सरकारों तथा गैर सरकारी संगठनों ने जो विशिष्ट विद्यालय (दिव्यांग बालकों को शिक्षा प्रदान करने वाली संस्थायें) स्थापित की हैं उन्हीं के माध्यम से ऐसे विभिन्न प्रकार के निःशक्त बालकों को उनकी दिव्यांगता अथवा निःशक्तता के आधार पर विशिष्ट पद्धति द्वारा शिक्षा पूर्ण रूप से प्रदान की जा सकती है। प्रश्न उठता है कि ऐसे निःशक्त बच्चों की आवश्यकता अनुरूप क्या उचित मात्रा में विशिष्ट शिक्षा प्रदान करने वाली संस्थायें उपलब्ध है? और यदि हैं भी तो ऐसे विद्यालयों की शिक्षण अधिगम व्यवस्था क्या उन बालकों की आवश्यकताओं को पूरी करती है? ऐसे विद्यालयों की प्रशासनिक व प्रबंधन व्यवस्था में कौन-कौन सी कठिनाई आती है? विद्यालयों की शैक्षिक व्यवस्था का निःशक्त बालकों और उनसे संबंधित सामाजिक अंगों पर क्या प्रभाव होता है? उपरोक्त प्रश्नों के आलोक में तथा समाज की इस गंभीर समस्या जो कि प्राकृतिक देन है, से सम्बन्धित अध्ययन शोधार्थिनी ने “दिव्यांग बालकों को विशेष शिक्षा प्रदत्त करने वाले विद्यालयों की शैक्षिक व्यवस्था का अध्ययन’’ शोध समस्या के अन्तर्गत किया। इस शोध के मुख्य निष्कर्ष प्रस्तुत शोध पत्र में वर्णित किये गये हैं। तथापि शोध का प्रमुख निष्कर्ष है कि सरकार एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा दिव्यांग बालकों की शिक्षा हेतु स्थापित विद्यालयों में भारी धनराशि वयय करने के बावजू़द भी उनमें भौतिक संसाधनों एवं प्रशिक्षित योग्य शिक्षकों की बहुत बड़ी कमी है।

Keywords :

दिव्यांग बालक, विशेष शिक्षा, विशिष्ट शिक्षा प्रदान करने वाले विद्यालय I