भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा का समन्वय: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विशेष संदर्भ में
Author : डॉ. अजय कुमार यादव
Abstract :
प्रस्तुत शोध पत्र भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System - IKS) की ऐतिहासिक प्रासंगिकता और आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इसके एकीकरण की आवश्यकता का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। सदियों से भारत ज्ञान और विज्ञान का वैश्विक केंद्र रहा है, जहाँ तक्षशिला और नालंदा जैसे संस्थानों ने समग्र विकास (Holistic Development) की नींव रखी थी। वर्तमान 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' इसी गौरवशाली विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ने का एक क्रांतिकारी प्रयास है। शोध का मुख्य केंद्र बिंदु यह समझना है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान, जो धर्म, दर्शन, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और गणित के विशाल भंडार से समृद्ध है, कैसे 21वीं सदी की आधुनिक शिक्षा के पूरक के रूप में कार्य कर सकता है। नीतिगत परिवर्तनों के आलोक में, यह शोध स्पष्ट करता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें मन, शरीर और आत्मा का संतुलन अनिवार्य है। शोध में 'बहु-विषयक शिक्षा' और 'मूल्य-परक अधिगम' के माध्यम से भारतीय संस्कारों और आधुनिक तकनीकी कौशल के मध्य सेतु बनाने पर बल दिया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश छात्रों में न केवल सांस्कृतिक गौरव और नैतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु एक वैकल्पिक और टिकाऊ (Sustainable) दृष्टिकोण भी प्रदान करेगा। निष्कर्षतः, आधुनिक शिक्षा के साथ प्राचीन भारतीय प्रज्ञा का यह समन्वय भारत को एक ऐसी 'ज्ञान महाशक्ति' के रूप में स्थापित करेगा, जहाँ प्रगति का आधार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानवीय और आध्यात्मिक भी होगा I
Keywords :
भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS), राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, आधुनिक शिक्षा, सर्वांगीण विकास, मूल्य-परक शिक्षा, विश्व गुरु, सांस्कृतिक पहचान I