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रायगढ़ घराने में कथक का नृत पक्ष

Author : डॉ. जितेश गड़पायले

Abstract :

प्रस्तुत शोध-पत्र श्रायगढ़ घराने में कथक का नृत पक्षश् कथक नृत्य शैली के नृत्त पक्ष (ताल-लय प्रधान नर्तन) को अन्य शास्त्रीय नृत्य शैलियों से उसे पृथक और विलक्षण सिद्ध करने वाला प्राण तत्व मानता है। नृत्त पक्ष कथक की लोकप्रियता का मुख्य कारक और कला का एक सृजनात्मक उपक्रम है।
कथक शैली में उठान, ठाट, आमद, तोड़ें, टुकड़े, परन, प्रिमलु व तत्कार जैसे सौन्दर्यपूर्ण अंग संचालन ताल विशेष में प्रदर्शित होते हैं, जहाँ तालपक्ष भावों को सूक्ष्मतर बनाता है। कथक उत्तर भारत की एकमात्र शास्त्रीय नृत्य शैली है, इसलिए स्थानों और पृष्ठभूमियों की विभिन्नता के कारण इसमें विभिन्न घरानों (जैसे जयपुर और लखनऊ) के रूप में पर्याप्त वैविध्य देखने को मिलता है।
रायगढ़ के राजा चक्रधर सिंह ने विभिन्न घरानों के गुरुओं को एकत्र कर कथक परम्परा का संरक्षण किया और एक नई शैली विकसित की। यही बाद में कथक के रायगढ़ घराने के रूप में प्रसिद्ध हुई। जयपुर घराने की विशेषता हिसाबी लय, क्लिष्ट बंदिशें, तेजी-तैयारी, और लय के चमत्कारपूर्ण प्रयोग हैं। वहीं, लखनऊ घराने में छोटी बंदिशों की खूबसूरती और ठाट, आमद के साथ विलम्बित लय पर नाच समाप्त करने का चलन है। नृत्त पक्ष के बोल, तोड़ व परन की पारंपरिक बंदिशें ही घराने का परिचय दे देती हैं।

Keywords :

शास्त्रीय नृत्य शैली में कथक की उपयोगिता और नृत्तांग उसका मुख्य तत्व। नृत्य शैलिय की विलक्षणता को सिद्ध करना, नृत्त पक्ष कथक का प्राण तत्व भी है।